Monday, November 13, 2017

इंतज़ार


ज़िन्दगी के हसीन पलों में
साथ थे मेरे कितने अपने
दोस्तों की हंसी से खिल उठी
मेरे जीवन के हर पल मीठी

आज तन्हाई की चादर ओढ़े
खडी  हूँ मैं उन मीठे यादों को समेटे
बेचेनियाँ दिल की मैंने  छुपायी
एक मुस्कान में, जो थी थकी हुई

दिल की आवाज़ किसी ने न सुनी
थी सूनसान वह पुराने रस्ते भी
काँटों भरी पगडंडीयों ने पेरों को नहीं
मेरे टूटे दिल को हैं घायल कर दि

आँसू भरी आँखों में क्यों दिखाई दिए
फिर वही चेहरा, जो मैंने भुला दिए
दिल की पनाहों में छुपायी यादें
बिन बुलाये दस्तक देते आगए ||

मन को संभलते संभलते थक गयी
कोई सहारा मिले यही आस लगायी
आज भी बैठी हूँ अपने चौखट पर 
उम्मीद लगाए कि तुम आए इस पार||


1 comment:

Geo said...

Nisha..ji
Kya khoob likha hein aapne...💞👍👏👏

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