दिल के दर्पण में मैंने जब
उतारी उम्मीदों की छवियाँ;
तो दिखाई दिए मुझे झलक
परमात्मा के पावन प्रेम का!
न मैं समझ पायी उनके
अपार लीला को कभी भी;
पर यकीन मेरे दिल में हैं
समझूँगी मैं भी एक दिन!
बस इक चाह हैं अभी दिल में
मोह माया में डूबकर यह मेरी
ज़िन्दगी कभी भी न हो जाए
एक ही पल में विध्वस्त !!!