Monday, November 21, 2011

जज़्बात

जज़्बातों के आँधियों में 
उजड़ गया मेरा जीवन;
तबाहियों के महफ़िल में 
हमें मिला अकेला पन...


जीवन से बहुत थी उम्मीदें 
सब मैंने अब खो दिए;
दोस्तों का जो साथ था,
वह भी कही बिखर गए!


मन में लिए हज़ारों ख्वाब
हम चले थे इस राह पर,
हमसफ़र मिला भी था हमें
लेकिन बिछड़ गए भीड़ में....


तन्हाई के काँटों ने चीर दी
दिल में बसे सपनों को,
बेबस बेसहारा छोड़ दिए हमें
ज़िन्दगी के इन राहों पर!!!


एक बार मुस्कुराना चाहूँ
तो भी हम मुस्कुरा न पाए
जज्बातों के इन आँधियों ने 
हमें जड़ से उखाड़ दिए!


अब जिए तो हम कैसे जिए- 
बिना कभी हँसे, या कभी रोये,
जज्बातों के बिना यह जीना
मौत से भी बत्तर हो गए!!! 



4 comments:

  1. As Shelley famously said, our sweetest songs, indeed, are those that tell of saddest thoughts. You sure have packed in a good emotional punch in this one, laced with wistfulness and a sense of irreparable loss.

    Just how you manage to juggle so effortlessly with English, Malayalam and Hindi and are still so prolific is, frankly, beyond me!

    Keep writing...we are all eyes and ears :-)

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  2. Thank you!!! Even I am surprised that I am able to write some of these...It just flows out, and I am fortunate enough to collect them in words, I guess....

    Many a times, a good word or two can motivate a person to move mountains... Feedback from my readers urge me to keep going. So, Thanks from the bottom of my heart!!!

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  3. फ़ोटो व शब्द दोनों ही दिल को छू गये।

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  4. संदीपजी,

    धन्यवाद!

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