Thursday, November 10, 2011

बचपन के दिन...


जाने कहाँ गए वो दिन 
बचपन के न्यारे,
निडर होके जब हम चले थे
हर राह पर;

कितने रंगीन थे वो दिन -
बचपन के हमारे
जब मन में थे मेरे, केवल
खुशियों के लहर!

बागों में नाचती तितलियों 
के पीछे भागना,
छम छम कर बरसते 
बारिश में भीगना;

बरगद के पेड़ के छाव तले
बेफिक्र सोना
फूलों और कलियों से दिन-
रात बाते छेड़ना;

तालाब के ठन्डे पानी में
गोते लगाना,
हरियाली खेतों में लहराते
पवन को छूना;

सुबहों में ओस की बूंदों के
मिठास चखना,
रातों को छत पर लेट आकाश
के तारे गिनना;

न जाने कहाँ गुम होगए
वो बहारें बेमिसाल
जाने कहाँ खो दिए मेने
बचपन के वो दिन सुनहरे!!!