Thursday, November 10, 2011

ज़िन्दगी !!!

ज़िन्दगी के हमने देखे हैं रंग अनेक
कुछ मीठी कुछ खट्टी, तो कुछ हैं भयानक!

कभी हम हँसे तो कभी हम रोये, 
कभी हम  डरे तो फिर कभी हम संभले;

कभी छाव में चले, तो कभी चले कड़ी धुप में;
कभी हम चल भी न पाए ज़िन्दगी के राहों  में!

यह ज़िन्दगी के हमने देखे हैं रंग हज़ार
यहाँ कभी प्यार तो कभी तकरार!

ज़िन्दगी के हैं अनेक वर्ण - चित्र-विचित्र
यही तो देती हैं हमें जिंदा रहने के औज़ार;

 कल मैं रहूँ न रहूँ, मुझे गिला शिकवा नहीं,
किसी भी दिन मेरी ज़िन्दगी बेरंग कटी नहीं !!!

4 comments:

  1. ज़िंदगी है ही रंग-बिरंगी । सुंदर रचना ।

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  2. Rajneeshji,
    Thank you for the comment!

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  3. ज़िन्दगी के हैं अनेक वर्ण - चित्र-विचित्र
    यही तो देती हैं हमें जिंदा रहने के औज़ार;

    सची में यही देते हे जीने का मज़ा , कभी हसना ,कबी रोना, नय तो क्या जीना ? निशा की कविता अछा लगा हमको .................लिखो लिखो और लिखो ................शुब्कामना !!!!

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    Replies
    1. धन्यवाद जोमोन! रंग बिरंगी दास्तानों के बिना ज़िन्दगी कितनी सूनी हैं...

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